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जाने वशीकरण का वैज्ञानिक सच क्या है

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जाने वशीकरण का वैज्ञानिक सच क्या है   ============================    वशीकरण :: भ्रम या सच  क्या सचमुच वशीकरण होता है  =====================  तंत्र ,अध्यात्म और सामान्य जनों में वशीकरण एक जाना पहचाना नाम है |पर क्या सचमुच वशीकरण ,मोहन ,आकर्षण आदि होता है ,यह प्रश्न बहुत से लोग करते हैं या यह मात्र भ्रम है |शास्त्रों और जन सामान्य की कथाओं ,उक्तियों में तो वशीकरण का क्षेत्र बहुत व्यापक है |देवता ,ईष्ट से लेकर सामान्य मनुष्य तक को वशीभूत करने के प्रयोग ,तरीके शास्त्रों में दिए गए हैं |बहुत से लोग खुद यह प्रयोग करते हैं ,करवाते हैं अथवा तांत्रिक आदि की मदद लेते हैं |यहाँ वहां इसके लिए दौड़ते ,प्रयास करते हैं |अगर वशीकरण जैसी कोई विद्या नहीं तो फिर क्यों इतना इसका प्रचार है ,क्यों लोग ऐसा प्रयास करते हैं |क्या केवल सुनकर ?या केवल पढकर |  तंत्र आदि गुह्य विद्याओं के शास्त्रों में लगभग सभी धर्मों में षट्कर्म जैसी विद्याएँ पाई जाती हैं | इनमे से ही एक विद्या वशीकरण भी है |वशीकरण ,सम्मोहन के ही समान कार्य करता है किन्तु इसमें व्यक्ति पूरे होशोहवास में सबकुछ जानते बूझते खुद ऐसी क्रियाएं और कार्य

डिप्रेसन [Depression] /अवसाद ज्योतिषीय /तांत्रिकी उपचार

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डिप्रेसन [Depression] /अवसाद  ज्योतिषीय /तांत्रिकी उपचार =========================================== डिप्रेसन अथवा अवसाद में मन की भूमिका सर्वोपरि होती है जबकि इसके प्रभाव से शारीरिक रूप से व्यक्ति खुद को पंगु समझने लगता है |मन जब अशांत हो ,दब गया हो तो शरीर की सुध जाती रहती है |न कुछ अच्छा लगता है न कुछ करने की इच्छा होती है |कभी कभी तो जीवन समाप्त कर देने की इच्छा उत्पन्न हो जाती है और जीवन व्यर्थ लगता है |कोई उद्देश्य समझ नहीं आता ,कोई लक्ष्य और प्रेरणा नहीं समझ आती |इसके कारण अनेक हो सकते हैं | यह कारण सामाजिक ,पारिवारिक ,आर्थिक ,शैक्षिक ,व्यावसायिक अथवा स्वयं के कारण उत्पन्न हुए हो सकते हैं किन्तु प्रभाव मन पर ही आता है |गृह दशाओं में परिवर्तन अथवा चन्द्रमा के प्रभाव से भी यह उत्पन्न होता है |कुछ लोगों के जीवन में चन्द्रमा आदि की स्थिति के कारण जीवन भर ऐसी स्थितियां उत्पन्न होने की संभावना होती हैं | यह प्रभाव जब उत्पन्न होता है तो मनोबल गिर जाता है |आत्मविश्वास समाप्त हो जाता है |कार्यक्षमता प्रभावित हो जाती है |सकारात्मक विचारों की बजाय नकारात्मक विचार उत्पन्न होने लगते हैं |अच्

कड़ी मेहनत के बाद भी प्रगति रुकी पड़ी है पर्याप्त आय पर भी क़र्ज़ चढ़ रहे हो तो संभव है

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कड़ी मेहनत के बाद भी प्रगति रुकी पड़ी है  पर्याप्त आय पर भी क़र्ज़ चढ़ रहे हो तो संभव है  आपके घर में  मृत आत्माओं का डेरा हो सकता है ,पर आपको पता नहीं  ======================================= आप अपनी जिन्दगी जी रहे और अपने घर में रह रहे होते हैं ,आपको कुछ दीखता तो नहीं पर आपके घर में अदृश्य शक्तियों का भी वास होता है |इनमे भूत ,प्रेत ,ब्रह्म ,पितृ ,आदि होते हैं |जब तक इनकी संख्या या ऊर्जा या शक्ति की मात्रा कम होती है तब तक आपको कुछ भी महसूस नहीं होता क्योंकि यह भौतिक शरीर में तो होते नहीं इसलिए दीखते नहीं |हर व्यक्ति मरने के तुरंत बाद जन्म नहीं लेता |बहुत से लोग मरने के बाद भूत -प्रेत बनते हैं जो सैकड़ों -हजारों वर्षों तक उसी योनी में रहते हैं |जिस स्थान से उनका लगाव होता है वहां वह अधिक विचरण करते हैं |आपने घर बनाया ,या किराए पर आये ,या फ़्लैट लिया और रहने लगे |आपको क्या पता यहाँ या इस जमीन के नीचे क्या क्या है |आपके घर के किसी सदस्य की मृत्यु हुई तो उसका भौतिक शरीर तो ख़त्म हो गया पर उसका सूक्ष्म शरीर और आत्मा तो रहती ही है वह आपके आस -पास ही घूमेगा या जहाँ उसकी मृत्यु हुई हो उस स्थान के आ

योगिनियां क्या है? एक परिचय

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योगिनियां क्या है? एक परिचय  ===================== :::::::::::::::::योगिनी ::::::::::::::: परमशक्ति और मनुष्य के बीच की एक पारलौकिक कड़ी ====================================== योगिनी अथवा जोगिनी प्रकृति की अलौकिक शक्तियां हैं ,जिन्हें मूल आदि शक्ति की सहचरी अथवा सहायिकाएं माना जाता है |इनकी स्थिति महाविद्या और सिद्ध विद्याओं के बाद के स्तर पर होती है |यह वह पारलौकिक शक्तियां हैं जिनका अस्तित्व सदैव बना रहता है ,हर युग ,हर काल में |यह अप्सराओं और यक्षिणियों से ऊपर की शक्तियां हैं जिनकी संख्या निश्चित है |इनकी संख्या ६४ मानी जाती है और तंत्र के मूल ग्रन्थ भी ६४ प्रकार के ही होते हैं | योगिनी शब्द योग से बना है..योग अर्थात संतुलन..| हर तल पे संतुलन..| साधना के क्षेत्र में साधक यदि पहले योगिनी साधना सफलता पूर्वक कर ले तो आगे की राह बहुत आसान हो जाती है..| योगिनी साधना से साधनात्मक जीवन में सबकुछ फटाफट होने लगता है..हर साधना पहले प्रयास में ही सफल होती है..| और सृष्टि में भैरव उत्पत्ति इन्ही योगिनियों की शक्ति से महादेव करते हैं..| भोलेनाथ के प्रिय गण महा-भैरव वीरभद्र तो सदा योगिनियों के साथ

अगर आपके पैसे कही फसे है तो निकालने के लिए करे ये स्तोत्र का पाठ | कार्तवीर्य स्तोत्र

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अगर आपके पैसे कही फसे है तो निकालने के लिए करे ये स्तोत्र का पाठ |  कार्तवीर्य स्तोत्र  =====================================================  कई लोग है जो कभी कभी एक विश्वास की वजह से अपने पैसो को खो देते है |  अगर आपने अपने रिश्तेदारों को पैसे दिए है चाहे वो कितने भी अपने हो, या अपने बिज़नेस पार्टनर को पैसे दिए हो , या किसी को ब्याज पर पैसे दिए फिर वो वापिस नहीं कर रहा तब लोग परेशान हो जाते है |   ऐसे में क्या करे ?  जब जब भी सब रास्ते बंद हो जाते है तब एक अध्यात्म का सर्वश्रेष्ठ रास्ता होता है जो सही मार्गदर्शन देता है |  ऐसा ही एक प्रयोग हामरे शास्त्रों में दिया हुआ है जिसके सम्पूर्ण अनुष्ठान से आपके पैसे को आप वापिस प्राप्त कर सकते हो |   " कार्तवीर्यस्तोत्र "  कार्तवीर्य स्तोत्र  इस स्तोत्र के 16000 पाठ करे |  या प्रतिदिन 160 पाठ करे |  इसमें कोई दशांश यज्ञ या तर्पण मार्जन की आवश्यकता नहीं है |    अनुष्ठान विधि  किसी भी दिन इस स्तोत्र का आरम्भ कर सकते है | इस स्तोत्र का पाठ करते समय लाल वस्त्र धारण करने है |  || अथ कार्तवीर्य स्तोत्र ||  ॐ कार्तवीर्य खलद्वेषी कृतवीर्यसुत

गृहस्थ जीवन में ख़ुशी के साथ दाम्पत्य सुख भी देता है हरिद्रा गणपति साधना

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गृहस्थ जीवन में ख़ुशी के साथ दाम्पत्य सुख भी देता है  हरिद्रा गणपति साधना ===================================== संभोग सुख और वीर्य स्तंभन प्रदान करता है हरिद्रा गणेश मंत्र प्रयोग ==================================================   भगवान श्री गणेश सर्वसिद्धिदायक, सुख-संपत्ति प्रदाता, ज्ञान-बुद्धि प्रदाता होने के साथ ही गृहस्थ जीवन को सुखी बनाने वाले देवता हैं। जिन लोगों का गृहस्थ जीवन सुखी नहीं हैं, जिन्हें संपूर्ण शारीरिक सुख  नहीं मिल पा रहा है उन्हें हरिद्रा गणेश मंत्र का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। इस मंत्र को सवा लाख जप कर सिद्ध कर ले .   मंत्र का फल --------------- हरिद्रा गणेश मंत्र गृहस्थ जीवन सुखी बनाने के साथ पौरुष, वीरता, वीर्य स्तंभन तथा संपूर्ण संभोग सुख प्रदान करता है। यह नपुंसकता समाप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।   मंत्र सिद्ध करने की विधि -------------------------------- विनियोग- अस्य हरिद्रा गणनायक मंत्रस्य मदन ऋषि: अनुष्टुपछंद: हरिद्रागणनायकोदेवता ममाभीष्टसिद्धयर्थे जपे विनियोग: । ध्यान- पाशांकुशौ मोदकमेकदंतं करैर्दधानं कनकासनस्थम् । हारिद्रखंडप्रतिमं त्रिनेत्रं

हनुमान चालीसा का पाठ कब और कितनी बार किया जाने से क्या लाभ मिलते है ?

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हनुमान चालीसा का पाठ कब और कितनी बार किया जाने से क्या लाभ मिलते है ? ======================================================== १. हनुमान चालीसा का 100 बार जप करने पर आपको सभी भौतिकवादी चीजों से मुक्ति मिल जाती है  २.हनुमान चालीसा का 21 बार जाप करने से धन में वृद्धि होती है। ३. हनुमान चालीसा का 19 बार जाप करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। ४.हनुमान चालीसा का 7 बार जाप करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ५.हनुमान चालीसा का 1 बार जप करने से भगवान हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है और आपको हर स्थिति में विजयी होने में मदद मिलती है। ६.अगर आप अपने जीवन में एक साथ कई परेशानियों से परेशान है और हनुमान जी की विशेष कृपा पाना चाहते है तो सुबह के 4 बजे 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ करे  ७.मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का 1 बार जप करने से हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है और मंगल दोष, साढ़े साती जैसे हर दोष का निवारण होता है। ८.भगवान हनुमान जी का नाम जप करने से आपके आसपास एक सकारात्मक आभा का निर्माण होता है। ९.राम नाम का जप या राम हनुमान का कोई भी राम भजन, हनुमान जी को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है क्योंक